बुधवार, 2 मार्च 2016

श्री विश्वकर्मा प्रार्थना

हे विश्वकर्मा ! परम प्रभु !, इतनी विनय सुन लीजिये । 
दु:ख दुर्गुणो को दूर कर, सुख सद् गुणों को दीजिये ।।
ऐसी दया हो आप की, सब जन सुखी सम्पन्न हों । 
कल्याण कारी गुण सभी में, नित नये उत्पन्न हों ।।
प्रभु विघ्न आये पास ना, ऐसी कृपा हो आपकी । 
निशिदिन सदा निर्मय रहें, सतांप हो नहि ताप की ।।
कल्याण होये विश्व का, अस ज्ञान हमको दीजिये । 
निशि दिन रहें कर्त्तव्य रल, अस शक्ति हमनें कीजियें ।।
तुम भक्त – वत्सल ईश हो, `भौवन` तुम्हारा नाम है । 
सत कोटि कोट्न अहर्निशि, सुचि मन सहित प्रणाम है ।।

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हो निर्विकार तथा पितुम हो भक्त वत्सल सर्वथा, 
हो तुम निरिहत तथा पी उदभुत सृष्टी रचते हो सढा ।
आकार हीन तथा पितुम साकार सन्तत सिध्द हो, 
सर्वेश होकर भी सदातुम प्रेम वस प्रसिध्द हो ।
करता तुही भरता तुही हरता तुही हो शृष्टि के, 
हे ईश बहुत उपकार तुम ने सर्वदा हम पर किये ।
उपकार प्रति उपकार मे क्या दें तुम्हे इसके लिए, 
है क्या हमारा श्रष्टि में जो दे तुम्हे इसके लिए ।


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जय दीन बन्धु सोक सिधी दैव दैव दया निधे, 
चारो पदार्थ दया निधे फल है तुम्हारे दृष्टि के ।

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